आईंस्टीन को कभी टक्कर देने वाले नहीं रहे महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह, पटना में हुआ निधन।

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (Mathematician Mathematician Vashisth Narayan Singh) का गुरुवार को लंबी बीमारी के बाद पटना (Patna) में निधन (Death) हो गया. वशिष्ठ नारायण सिंह की मौत के बाद पटना के पीएमसीएच (PMCH) प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है. वशिष्ठ बाबू के निधन के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा उनके परिजनों को शव (Dead Body) ले जाने के लिए एंबुलेंस (Ambulance) तक नहीं मुहैया कराया गया. इस महान विभूति के निधन के बाद उनके छोटे भाई ब्लड बैंक के बाहर शव के साथ खड़े रहे.

निधन के बाद पीएमसीएच प्रशासन द्वारा केवल डेथ सर्टिफिकेट (मृत्यु प्रमाणपत्र) देकर पल्ला झाड़ लिया गया. इस दौरान जब वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम अपने पैसे से अपने भाई का शव गांव ले जाएंगे. उन्होंने कहा कि मेरे भाई के निधन की खबर के बाद से न तो कोई अधिकारी आया है और न ही कोई राजनेता. वशिष्ठ नारायण सिंह के छोटे भाई ने कैमरे के सामने रोते हुए कहा कि अंधे के सामने रोना, अपने दिल का खोना. उन्होंने कहा कि मेरे भाई के साथ लगातार अनदेखी हुई है. जब एक मंत्री के कुत्ते का पीएमसीएच में इलाज हो सकता है तो फिर मेरे भाई का क्यों नहीं.

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परिचय

# 2 अप्रैल 1946 : जन्म.
# 1958 : नेतरहाट की परीक्षा में #सर्वोच्च_स्थान.
# 1963 : हायर सेकेंड्री की परीक्षा में #सर्वोच्च_स्थान.
# 1964 : इनके लिए पटना विश्वविद्यालय का कानून बदला। सीधे ऊपर के क्लास में दाखिला. बी.एस-सी.आनर्स में सर्वोच्च_स्थान.
# 8 सितंबर 1965 : #बर्कले विश्वविद्यालय में आमंत्रण दाखिला.
# 1966 : #नासा में.
# 1967 : #कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स का #निदेशक.
# 1969 : #द_पीस_आफ_स्पेस_थ्योरी विषयक तहलका मचा देने वाला शोध पत्र (पी.एच-डी.) दाखिल.
# बर्कले यूनिवर्सिटी ने उन्हें #जीनियसों_का_जीनियस” कहा.
# 1971 : #भारत_वापस देशभक्ति का कीड़ा काटा
# 1972-73: #आइआइटी कानपुर में #प्राध्यापक, टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च (ट्रांबे) तथा स्टैटिक्स इंस्टीट्यूट के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन.
# 8 जुलाई 1973 : #शादी.
# जनवरी 1974 : #विक्षिप्त, रांची के मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती.
#सिज़ोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से पीड़ित
# 1978: सरकारी इलाज शुरू.
# जून 1980 : सरकार द्वारा #इलाज_का_पैसा_बंद.
#1982 : डेविड #अस्पताल में #बंधक.
# नौ अगस्त 1989 : गढ़वारा (खंडवा) स्टेशन से लापता.
# 7 फरवरी 1993 : डोरीगंज (छपरा) में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर #फेंके_गए_जूठन में #खाना तलाशते मिले.
# तब से रुक-रुक कर होती #इलाज #की सरकारी/प्राइवेट #नौटंकी.
# पिछले दो दिन से : पीएमसीएच के आईसीयू में.
(खबर है कि जान बची हुई है। जल्द रिलीज हो जाएंगे).
बहुत ही मामूली आदमी का बेटा वशिष्ठ से आखिर क्या गलती हुई कि आज इस सिचुएशन में हैं?
सिर्फ और सिर्फ यही कि उनके पोर-पोर में देशभक्ति घुसी थी। अमेरिका का बहुत बड़ा ऑफर ठुकरा कर अपनी मातृभूमि (भारत) की सेवा करने चले आए। और भारत माता की छाती पर पहले से बैठे सु (कु) पुत्रों ने उनको पागल बना दिया।
वह वशिष्ठ पागल हो गया, जिनका जमाना था; जो गणित में आर्यभट्ट व रामानुजम का विस्तार माना गया था;
वही वशिष्ठ, जिनके चलते पटना विश्वविद्यालय को अपना कानून बदलना पड़ा था। इस चमकीले तारे के खाक बनने की लम्बी दास्तान है।
डॉ.वशिष्ठ ने भारत आने पर इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कोलकाता) की सांख्यिकी संस्थान में शिक्षण का कार्य शुरू किया। कहते हैं यही वह वक्त था, जब उनका मानसिक संतुलन बिगड़ा। वे भाई-भतीजावाद वाली कार्यसंस्कृति में खुद को फिट नहीं कर पाये |

 

Source : Social media

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